ये हैं वे महानुभाव जिनके चरण कमल टंकारा में पड़े

राजगुरु श्री धुरेन्द्र शास्त्री (स्वामी ध्रुवानन्द) प्रधान, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, श्री लक्ष्मीदत दीक्षित (स्वामी विद्यानन्द), स्वामी सत्यदेव परिव्राजक, आचार्य विद्यानन्द विदेह – अजमेर, आचार्य भगवानदेव (स्वामी ओमानन्द, आचार्य गुरूकुल झज्जर), आचार्य मेधावृतजी (गुरूकुल इटोला), श्री शिवराजसिंह शास्त्री बी. ए. मौलवी फाज़िल, (शास्त्रार्थ महारथी), स्वामी नारायणानन्दजी ( अफ्रिका में प्रचारक ), डॉ. भवानीलाल भारतीय, पं. नानुरामजी – भजनोपदेशक,  श्री प्राणनाथ वानप्रस्थी (राजपाल एण्ड संस परिवार), श्री ओम प्रकाश त्यागी ( सर सेनापति, सार्वदेशिक आर्यवीर दल), श्री बाल दिवाकर हंस ( महामन्त्री – सार्वदेशिक आर्यवीर दल), श्री एम. के. अमीन ( संचालक – मुंबई प्रदेश आर्यवीर दल ), श्री प्रकाशवीर शास्त्री ( सांसद ), श्री अलगुराय शास्त्री ( अध्यक्ष – उत्तर प्रदेश विधान सभा), महाराजा उमेदसिंह – शाहपुरा (राज) नरेश, ठाकुर लखधीरसिंहजी – मोरबी नरेश, कुंवर चांदकरण शारदा – अजमेर, कुंवर जोरावरसिंहजी – भजनोपदेशक (पाकिस्तान पच्चीसी फेइम), श्री पन्नालाल पियूष - भजनोपदेशक, श्री ताराचन्द गाजरा – प्रधान, सिंध आर्य प्रतिनिधि सभा, प्रो. हासानन्द – जादूगर – प्रचारक, श्री भ्रमित जोषी, श्री वेणीभाई आर्य – मुंबई प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा, श्री बलदेवभाई आर्य – मुंबई प्रदेश आर्य प्रतिनिधि सभा, पं. आनन्द प्रियजी – आर्यकन्या गुरुकुल बडोदरा, सेठ नानजीभाई कालिदास महेता – आर्य श्रेष्ठी, श्रीमती संतोकबहन नानाजीभाई मेहता, कु. सविताबहन नानजीभाई महेता, सेठ प्राणलाल देवकरण नानजीभाई (देना बेंक), श्रीमती जयाबहन प्राणलाल, श्री चतुरभाई बाबरभाई पटेल – गुरुकुल सोनगढ़, श्री मणिभाई पटेल – गुरुकुल सोनगढ़,  श्री कीरिटसिंहजी – गुरुकुल सोनगढ़ विद्यार्थीओं के साथ श्री चन्द्रमणीजी – आर्यकुमार महासभा – बडोदरा,   पं. भूलाशंकर – उपदेशक, श्री भारतेन्द्रनाथजी, श्रीमती राकेश रानीजी, पं. क्षितीश वेदालंकार -  संपादक, हिन्दुस्तान साप्ताहिक, पं. वेदमित्र ठाकोर – जोशीले वक्ता, लेखक, प्रो. अर्जुन देव – प्रो. शामलदास कोलेज, भावनगर, श्रीमती सीतादेवीजी अर्जुनदेव, श्री मगनलाल भगवानजी जोषी - अध्यक्ष सौराष्ट्र विधान सभा, श्री परशुराम रामजीभाई दूधात, श्री वेदव्रत चौधरी (टंकारा में निवास कर स्मारक के लिए प्रयत्नशील) 

ये कुछ नाम श्री दयाल मुनि वानप्रस्थ के पास स्मृति में अंकित थे, जो हमें प्राप्त हुए | इनके सिवा बीसियों आर्य प्रेमी ऋषि भक्त टंकारा पधारते रहें और उनका यथासामर्थ्य सत्कार आर्यसमाज टंकारा करता रहा |