अनाथ असहाय परिवारों को राशन

Hosipital

 

 

सन् १९९५ में आर्यसमाज के प्रधान श्री अमृतलाल मेघजी ठक्कर ने सेवाकीय प्रवृति में एक नया अध्याय जोड़ा | उन्होंने सोचा, टंकारा ऋषि का जन्मग्राम है | आर्योंका तीर्थ स्थल है | इस गाँव में कोई व्यक्ति भूखा नहीं सोना चाहिए | हो सकता है कोई निराधार, अनाथ, वृद्ध, असहाय, अस्वस्थ हो और उनके पास आय का कोई साधन न हो, एसे व्यक्ति-परिवारों को महिने भर का कच्चा राशन दिया जाय | माननीय प्रधान जी ने इस में होनेवाला व्यय भार स्वयं वहन कर प्रकल्प प्रारंभ किया | हर महिने की पहली तारीख को लगभग ८० (अस्सी) व्यक्तियों के लिए दाल, अनाज, तेल, खिचडी, चीनी, आदि दिया जाने लगा | जरुरत मंदों के लिए नवजीवन प्रदान करने वाला यह कार्य पिछले १७ वर्षों से चल रहा है | प्रधान श्री अमृतलालजी और उनका परिवार तो अपना व्रत पालन करता ही है, कुछ अन्य सेवाधर्मी दाता भी अपना अंशदान देकर पुण्य के भागी बनने लगे है |