आर्यवीर दल

Aryavirdal

 

 

सन् १९८४ में आर्यवीर दल की गतिविधि को क्रियान्वित किया गया | हालांकि इस से पूर्व श्री दयालजीभाई आर्य ने और तत्पश्चात् श्री भगवानदेव शर्मा ने आर्यवीर दल व व्यायाम शाला शुरू की थी | जो कई वर्षों से बन्द थी | इसे पुन: प्रारंभ किया गया | इसे प्रारंभ करने में आर्यवीर दल ध्रांगध्रा ने महत्वपूर्ण योगदान दिया | जून १९८४ में दस दिनों का स्थानीय आर्यवीर दल शिविर हुआ, जिसमें ध्रांगध्रा के नव युवकों ने अपना समय व श्रमदान दिया | टंकारा के अनेक युवकों ने शारीरिक व बौद्धिक प्रशिक्षण प्राप्त किया | टंकारा की गली-गली से बच्चें इसमें शामिल हुए | शिविर पूर्णाहुति का भव्य कार्यक्रम हुआ | और नियमित शाखा चलाने का संकल्प लिया गया | नये नये युवक जुड़ने लगे | युवकों के व्यायाम कौशल्य के प्रदर्शन के कार्यक्रम टंकारा नगर के विविध मोहल्लों, चौराहों और आसपास के गाँवो में रखे जाने लगे | अर्यावीरों के करतब से प्रोत्साहन और प्रशंसा मिलने लगी | वर्ष में दो बार गर्मियों और दिवाली की छुट्टीयों में स्थानिक शिविर लगाये जाने लगे | आज २८ वर्षों से नव युवकों के जीवन निर्माण का उत्तम कार्य आर्यवीर दल टंकारा कर रहा है | ऐसा कहने में अतिश्योक्ति नहीं है कि आर्यवीर दल ही इस आर्यसमाज टंकारा का प्राण है | प्रत्येक प्रवृतियों को संचालित करने में ये आर्यवीर ही निष्काम भाव से अपना तन-मन लगाते हैं |