वेदप्रचार

Aryavirdal

 

 

आर्यसमाज का मुख्य कार्य वेदों का प्रचार करना है | अन्य सेवा आदि कार्य गौण कार्य हैं | इसलिए प्रत्येक आर्यसमाजों में वेदप्रचार सप्ताह का आयोजन होता है | आर्यसमाज टंकारा प्रतिवर्ष वेदप्रचार सप्ताह तो मनाता ही था, परन्तु पिछले चार वर्षों से वेदप्रचार मास और उससे भी अधिक दिनों तक वेदप्रचार अभियान चलाया जा रहा है | पूरा सावन मास वेद ध्वनि की गुंज टंकारा की गलियों में गुंजती रहती है | इस वर्ष यह प्रचार यात्रा टंकारा में सवा दो मास चली और नया कीर्तिमान स्थापित किया |

इस कार्यक्रम में यज्ञ-भजन के पश्चात् वैदिक धर्म के सिद्धान्तों की जानकारी, उसकी विशेषता, महत्त्व पर प्रकाश डाला जाता है | और इनका पालन न करने पर देश-दुनियाँ को उठानी पड रही हानि का भी जीक्र किया जाता है | इतिहास की भूलो से अवगत कराया जाता है | पौराणिकता के कुचक्र में फंसी जनता के लिए आर्य सिद्धान्त नये व आकर्षक लगते हैं, और उनके मन में प्रश्न-शंका-पैदा होती हैं, तो उसका समाधान भी किया जाता है | इस वार्षिक वेदप्रचार अभियान की पूर्णाहुति का कार्यक्रम विशाल स्तर पर आयोजित किया जाता है | जिस में उन सभी परिवारों को सहपरिवार निमन्त्रित किया जाता हैं, जिन्होंने अपने घर वेदप्रचार का सत्संग रखवाया हों | सामूहिक रूप में अधिक यज्ञकुंडो पर उनको बैठाकर यज्ञ कराया जाता है और आशीर्वाद दिया जाता है | विद्वानों के प्रवचन व प्रीतिभोजन का आनन्द सब उठाते हैं | बड़े स्तर पर हों रहे इस अभियान का प्रभाव यह रहा है, कि कई लोंगो ने अपने परिवार से अवैदिक मान्यताओं का परित्याग कर दिया है | आर्यसमाज टंकारा ने कृण्वन्तो टंकारा आर्यम् का जो लक्ष्य बनाया है, उसको साकार होने के आसार दीख रहे हैं | आर्यसमाज के प्रति लोगों की नकारात्मक सोच प्राय: हट गई है, और आर्यसमाज से जुडने में गौरव अनुभव करने लगे हैं |