आर्यसमाज का १३१ वां स्थापना दिवस मनाया गया

Sthapana Divas

महर्षि दयानन्द सरस्वती ने संसार के उपकार के लिए सन् १८७५ में सर्वप्रथम आर्यसमाज की स्थापना मुम्बई में की | जिसका १३१ वां स्थापना दिवस आर्यसमाज टंकारा में उत्साहपूर्ण मनाया गया | विशेष यज्ञ में तीन यजमान दम्पती बिराजमान हुए | पुरोहित पं. सुवास शास्त्री ने यज्ञ सम्पन्न कराया |
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में स्वामी विवेकानंदजी परिव्राजक (रोजड़) आमन्त्रित थे | अपने विशेष उद्बोधन में स्वामी जी ने मनुष्य जीवन के मुख्य लक्ष्य ‘मोक्ष’ के बारे में चर्चा की | स्वामीजी ने श्रोताजनों से पूछा कि संसार में रहना अच्छा है कि मोक्ष में ? संसार में रहकर कोई व्यक्ति संपूर्ण सुखी नहीं रह सकता | मोक्ष का आनन्द सर्वोत्तम है | और उसे मनुष्य जीवन में ही प्राप्त किया जा सकता है | जिसे प्राप्त करने का रास्ता महर्षि पतञ्जलि ने योग दर्शन में बताया है | यम-नियम का पालन करते हुए योग के अन्य अंगों पर क्रमशः आगे बढ़ते हुए समाधि तक पहुँचना है | आवश्यकताएँ कम करते जाए, ममत्व हटाते जाए; यही सुखी होने का रास्ता है | अपने प्रवचन के पश्चात शंका-समाधान का कार्यक्रम लगभग ३० मिनट चलाया | श्रोताओं के मन की जिज्ञासाओं को-शंकाओं को अति सरल शैली में समाधान किया |
इस समय उपदेशक महाविद्यालय के आचार्य रामदेव शास्त्री भी विशेष उपस्थित थे | उन्हों अपने प्रवचन में आत्मा और परमात्मा की चर्चा की, व मोक्ष की अवधारणा स्पष्ट की |
इस स्थपाना दिवस पर आर्यसमाज टंकारा की ओर से ‘टंकारा ग्राम सुधार अभियान’ के अंतर्गत प्रतिवर्ष विशेष सम्मान पत्र ऐसे व्यक्ति को दिया जाता है, कि जिसनें धार्मिक या सामाजिक रूढियों के बन्धन तोड़कर समाज सुधार का कार्य किया हो और समाज को नया रास्ता दिखाया हो | इस वर्षं यह सम्मान श्री हसमुखभाई घेटिया को प्रदान किया गया | इन्हों ने अपने पिताजी श्री जेराजभाई के देहान्त पर किसी प्रकार का पौराणिक कर्मकांड नहीं किया व सामाजिक परम्परा प्रेतभोज को भी तिलांजलि दी | समाज की आलोयना को सहा परन्तु अपने निर्णय पर अडिग रहे | श्री विनोदराय परमारने भी अपने पिताश्री के देहान्त पर आंशिक रूप में रूढि गत मान्यताओं को तिलांजलि दी अत: उनको भी सम्मानित किया गया |
कार्यक्रम का संचालन करते हुए आर्यसमाज के मन्त्री श्री हसमुख परमार ने बताया कि आर्यसमाज का लक्ष्य ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ को सार्थक करने के लिए ‘कृण्वन्तो टंकारा आर्यम्’ को हमने लक्ष्य बनाया है, इसी का एक भाग यह ‘टंकारा ग्राम सुधार अभियान’ है |
कार्यक्रम के समापन में उपमन्त्री श्री देवकुमारने आभार प्रकट करते हुए आर्यसमाज टंकारा की कुछ भावी योजनाओं की घोषणा की जिनमें मल्टी मीडिया से वैदिक सन्देश प्रचार योजना  मुख्य है | पूरे कार्यक्रम को सेंकडों नगरजनों ने उपस्थित रहकर उत्सव का रूप दे दिया |