आयुर्वेद औषधालय

Hosipital

 

 

जन-सेवा करना आर्यसमाजने अपने जन्म से ही सीखा है | इसी क्रम में आर्यसमाज टंकारा ने सन् १९९० में ‘महर्षि दयानन्द आयुर्वेदिक औषधालय’ प्रारंभ किया | नाम मात्र का शुल्क (एक रूपया) रखा गया | जिसमें निदान व उपचार, दवाई आदि से दर्दी कि सेवा करना शामिल है | २२ वर्ष से यह प्रवुत्ति चल रही है | श्री दयालजीभाई आर्य (अब श्री दयालमुनि वानप्रस्थी) आयुर्वेद कालेज से निवृत होकर टंकारा में ही रहने आ गये, और अपनी नि:शुल्क सेवा इस औषधालय में दे रहे हैं | आपके अनुभव का लाभ सेंकड़ों दर्दियों को मिलता हैं | दूर दराज से लोग यहाँ आकर अपने शरीर कि पीड़ा से निवृत होते हैं, और अपने आशीर्वादों कि वर्षा करते हैं | इस औषधालय में आर्यवीर दल के युवक अपनी सेवा देते हैं | टंकारा नगर के एक कोने में यह समाज मन्दिर स्थित है, पर यह समाज जन-जन को आर्यसमाज से जोड़ने का स्तुत्य कार्य इस प्रवृति से कर रहा है |