नि:शुल्क अंत्येष्टि संस्कार

सन् १९९० से समाज सेवा की एक अन्य प्रवृति भी शुरु की गई | मानव जीवन के सोलह संस्कार हैं | उनमें से जीवन का अन्तिम संस्कार आर्यसमाज टंकारा की और से नि:शुल्क करने का निश्चय हुआ | शुद्ध घी, हवन सामग्री आर्यसमाज से नि:शुल्क ले जाकर और वेद मन्त्रोच्चार से दाह संस्कार क्रिया मृतक के परिवार जनों से कराई जाती है | शोक की घड़ियों में परिवार जनों से आत्मशान्ति के लिए प्रार्थना कराई जाती है, इस से धैर्य, प्रेम व मानवता का संदेश उनके ‌‍ह्रदय और मन को सान्त्वना पहुँचता है | उत्तम सेवा का यह कार्य टंकारा निवासियों में आर्यसमाज से प्रति अपनापन जगाता है |

यह एक एसा कार्य है, जिसका कोई अंदाजा नही होता, समय निश्चित नहीं होता | परन्तु आज इस सेवा प्रकल्प को प्रारंभ हुए २२ वर्ष हो गये हैं, आर्यसमाज के कार्यकर्ता हर घड़ी इस सेवा के लिए उद्यत रहते है | कुछ वर्षों तक श्री भगवानजी भाई परमार और श्री द्वारकादास कक्कड ने इस के लिए अपना समयदान दिया | इस समाज के पास कोई पंडित-पुरोहित नहीं है, अत: आर्यवीर दल ही इसकी जिम्मेदारी उठाता है | दाह संस्कार में होने वाले खर्च में भी आर्यसमाज टंकारा यथा संभव सहायता करता है |