पुस्तकालय एवं वाचनालय

Library - Aryasamaj

 

पुस्तकालय आर्यसमाज का अभिन्न अंग है | बिना स्वाध्याय कोई आर्य बन नहीं सकता | इसलिए आर्यसमाज के संविधान में पुस्तकाध्यक्ष का पद अनिवार्य रूप से रखा गया है | अत: इस समाज ने अपना सर्वप्रथम भवन (सन् १९३६ में) बनाया उस समय ही पुस्तकालय खंड का निर्माण किया था | पुस्तकालय खंड की अलमारियाँ और पुस्तकों के दाताओं ने लगभग ३००० पुस्तकों के पुस्तकालय समृद्ध कर दिया | श्रीमान परशुराम रामजी दुधात (जामनगर) ने अपनी माताजी की स्मृति में जमीन खरीद कर पुस्तकालय खंड के निर्माण के लिए आर्यसमाज टंकारा को अर्पित की | श्रीमान पं. श्रीपाद दामोदर सातवडेकर (औंध-सतारा) , सस्तु साहित्य वर्धक कार्यालय, अहमदाबाद, श्रीमती चंचलबहन पाठक, श्री हरजी मकनजी सुथार (कोटडानायाणी), पू. स्वामी सत्यदेवजी, वैदिक साहित्य मंडल, अजमेर आदि ने साहित्य भेंट किया | श्री गिरधरलाल जी महेता व  अन्य सज्जनो ने अलमारियाँ भेंट की | पुस्तकों को विषय, भाषा और लेखक के अनुसार विभागीकरण कर बड़े परिश्रम से श्री नानालाल टांक ने सूचीकरण किया | यह कार्य इतना सूक्ष्म द्रष्टि से किया जैसे कोई ग्रन्थालय विज्ञान विशेषज्ञ ने किया हो |

 

आर्ष साहित्य प्रकाशन निधि 

अप्राप्य-दुष्प्राप्य आर्ष साहित्य, विशेष कर गुजराती भाषा में प्रकाशित करने के लिए नानालाल टांक ने एक राशि अर्पित कर आर्ष साहित्य प्रकाशन निधि स्थापित की है | श्री दयालमुनी वानप्रस्थी ने भी इस में अपना अनुदान दिया है | इस निधि से साहित्य प्रकाशन किया जाता है |
 
 

आर्य साहित्य विक्रय विभाग  

गुजरती – हिन्दी भाषा के वैदिक साहित्य का विक्रय विभाग संचालित किया जाता है |