बालवाडी

Balvadi - Aryasamaj

 

 

सन् १९८१ में आर्यसमाज टंकारा में छोटे बच्चों के लिए नि:शुल्क बालवाडी (बालमंदिर) का प्रारंभ हुआ | आर्यसमाज भवन अल्प विकसित बस्ती के मध्य में है | और आर्यसमाज का काम सामाजिक उन्नति का है | इस बस्ती के बच्चों के लिए आर्यसमाज की यह बालवाड़ी सामाजिक उन्नति का उत्तम साधन बन गई | लगभग १२५ नन्हें-मुन्हें बच्चों से आर्यसमाज मन्दिर का आंगन गुंजाने लगा | बच्चों को संस्कारित करने की शिक्षा दी जाने लगी | स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाने लगा | आपस में मिलजुल कर रहेने का प्यार का सन्देश घर-घर पहुँचने लगा | गायत्री मन्त्र का पाठ करना, खेलकूद और खिलौने आदि साधनों के प्रयोग से तन और मन में चैतन्य जगने लगा, बच्चों को सात्विक अल्पाहार भी देना आर्यसमाज ने स्वीकार किया | बच्चें और बच्चों के अभिभावक आर्यसमाज को इस प्रवृति से खुश हुए और आर्यसमाज के निकट आये, परिचय बढ़ा |

आज ३१ वर्षो से चल रही इस सेवाकीय प्रवृति से सेंकडो बच्चों के संस्कारित कर आर्यसमाज टंकारा अपना कर्तव्य पालन कर रहा है |